एक नए विवादास्पद अध्ययन में दावा किया गया है कि dark matter नाम का रहस्यमय पदार्थ, जो ब्रह्मांड का अधिकांश हिस्सा माना जाता है, शायद बिल्कुल मौजूद ही ना हो। यह अध्ययन एक सम्मानित वैज्ञानिक पत्रिका “द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल” में प्रकाशित हुआ है और ब्रह्मांड की हमारी मौजूदा समझ को चुनौती देता है।

अध्ययन में यह भी दावा किया गया है कि ब्रह्मांड हमारे अनुमान से 10 अरब साल से भी ज्यादा पुराना हो सकता है। अध्ययन के मुख्य लेखक कनाडा के ओटावा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राजेंद्र गुप्ता हैं।
अध्ययन यह मानने से इनकार करता है कि ब्रह्मांड का 27% हिस्सा dark matter और बाकी 5% से भी कम हिस्सा सामान्य पदार्थ से बना है। प्रोफेसर गुप्ता का दावा है कि आकाशगंगाओं के मानचित्रों में पाए जाने वाली ध्वनि तरंगों को इस तरह से समझा जा सकता है कि वे यह संकेत देते हैं कि बिग बैंग हमारे मौजूदा मॉडलों के अनुमान से 13 अरब साल पहले हुआ था।
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अध्ययनकर्ता का कहना है कि “इस अध्ययन के नतीजे हमारे पिछले शोध को पुष्ट करते हैं, जिसके अनुसार ब्रह्मांड की उम्र 26.7 अरब साल है और इस उम्र के कारण ब्रह्मांड को dark matter की जरूरत नहीं है। मानक ब्रह्माण्ड विज्ञान में, ब्रह्मांड के विस्तार को गति देने वाले कारक को डार्क एनर्जी माना जाता है, लेकिन असल में यह ब्रह्मांड के फैलने के साथ कमजोर होती हुई प्राकृतिक शक्तियों के कारण होता है।”
dark matter क्या है :
ब्रह्मांड का रहस्य: dark matter
ब्रह्मांड विशाल और रहस्यों से भरा हुआ है. हमारी आकाशगंगा समेत खगोलविदों ने अब तक अरबों खगोलिय पिंडों को देखा है, लेकिन ब्रह्मांड का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा ही है जिसे हम समझ पाए हैं। इस अदृश्य जगत में सबसे बड़ा रहस्य है “डार्क मैटर” (अंधकार पदार्थ).
डार्क मैटर एक ऐसा पदार्थ है जिसे हम ना तो देख सकते हैं और ना ही किसी उपकरण से पता लगा पाए हैं. फिर भी, वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्रह्मांड का लगभग 27% भाग डार्क मैटर से बना है, जबकि सामान्य पदार्थ, जिससे ग्रह, तारे और हमारी आकाशगंगा बनी है, ब्रह्मांड का मात्र 5% है. बाकी का 68% भाग “डार्क एनर्जी” (अंधकार ऊर्जा) माना जाता है.
हालांकि डार्क मैटर को हम देख नहीं सकते, लेकिन खगोलविदों को इसके अस्तित्व के कई प्रमाण मिले हैं. उदाहरण के लिए, आकाशगंगाओं में तारों का गतिमान बताता है कि उन पर गुरुत्वाकर्षण का बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ रहा है. यह गुरुत्वाकर्षण केवल आकाशगंगा में दिखने वाले पदार्थ से उत्पन्न नहीं हो सकता. वैज्ञानिकों का मानना है कि आसपास मौजूद डार्क मैटर ही आकाशगंगाओं को बिखरने से रोक रहा है.
डार्क मैटर के स्रोत और स्वरूप को लेकर कई सिद्धांत हैं. कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि यह कमजोर रूप से परस्पर क्रिया करने वाले भारी कणों (WIMPs) से बना है, तो कुछ का मानना है कि यह न्यूट्रिनो जैसे अल्प द्रव्यमान कणों (axions) का एक रूप हो सकता है.
डार्क मैटर की खोज वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी चुनौती है. इसके अस्तित्व को सिद्ध करने के लिए कई बड़े प्रयोग चल रहे हैं, जिनमें सुपरकैमेनो टोलेनम डार्क मैटर सर्च (Super-Kamiokande Dark Matter Search) और एक्सन जेट डार्क मैटर एक्सपेरिमेंट (Axion Dark Matter Experiment) शामिल हैं.
डार्क मैटर की खोज ब्रह्मांड के रहस्यों को खोलने की कुंजी हो सकती है. यह हमें यह समझने में मदद कर सकता है कि ब्रह्मांड कैसे बना और भविष्य में इसका क्या रूप होगा.

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