यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के सचिव टिम कर्टिस ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय संग्रहालय में आयोजित एक कार्यक्रम में दी गई प्रस्तुति के दौरान इस पर विवरण साझा किया।
गुजरात के गरबा को मिला यूनेस्को सम्मान का मौका!

अच्छी खबर! गुजरात के पारंपरिक गरबा नृत्य को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल करने के लिए भारत सरकार ने नामांकन किया है। ये जानकारी शनिवार को यूनेस्को की इंटैंगिबल कल्चरल हेरिटेज के सचिव, टिम कर्टिस ने नई दिल्ली के नेशनल म्यूजियम में आयोजित एक कार्यक्रम में दी।
बता दें, पिछले दिसंबर में कोलकाता के दुर्गा पूजा को ही यूनेस्को की इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया गया था। इसे ध्यान में रखते हुए हुए आयोजित इस कार्यक्रम में टिम कर्टिस ने गरबा के नामांकन की जानकारी साझा की।
अब देखना ये दिलचस्प होगा कि यूनेस्को की समिति गरबा को अपनी सूची में जगह देती है या नहीं। लेकिन भारत सरकार द्वारा इसके लिए किया गया नामांकन अपने आप में ही गुजरात के इस लोकप्रिय नृत्य रूप के लिए गर्व की बात है!
यूनेस्को की सूची में शामिल होने के लिए गुजरात के गरबा के नामांकन पर अगले साल विचार किया जाएगा। यूनेस्को के इंटैंगिबल कल्चरल हेरिटेज के सचिव टिम कर्टिस ने बताया कि नामांकन फाइलों की जांच 2023 के मध्य में की जाएगी और अंतिम फैसला अगले साल के अंत तक समिति के 2023 सत्र में होगा।

उन्होंने बताया कि फिलहाल नामांकन प्रक्रिया चल रही है। अपने भाषण में, टिम कर्टिस ने भारत की समृद्ध और विविध अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रशंसा की और कहा कि भारत में इस तरह की विरासत की एक लंबी सूची है।
बता दें कि वर्तमान में भारत के 14 अमूर्त सांस्कृतिक विरासत तत्व यूनेस्को की सूची में शामिल हैं, जिनमें रामलीला, वैदिक मंत्र, कुंभ मेला और हाल ही में शामिल कोलकाता का दुर्गा पूजा शामिल हैं।
गुजरात के गरबा के नामांकन के बाद भी दुर्गा पूजा की कहानी यादगार
पिछले साल ही फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित 16वें सम्मेलन में कोलकाता की दुर्गा पूजा को यूनेस्को की सम्मानित सूची में शामिल किया गया था। इसे भारत के लिए बड़ा गौरव माना गया था। समिति ने दुर्गा पूजा में हाशिए के समुदायों, व्यक्तियों और खासकर महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की थी।

नई दिल्ली में यूनेस्को कार्यालय के निदेशक और प्रतिनिधि एरिक फाल्ट ने कहा कि दुर्गा पूजा को हाल ही में शामिल किया जाना इस बात का उदाहरण है कि कैसे सभी हितधारक एक साथ आए।
उन्होंने कहा, “शायद ही दुनिया में कोई और देश होगा जहां भारत जितनी अमूर्त सांस्कृतिक विरासतें मौजूद हों। और उनमें से कई को संरक्षण की जरूरत है। हम यूनेस्को में भारत सरकार के साथ मिलकर स्मारकों और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में काम करते हैं, जिन्हें अक्सर पर्यटक देख नहीं पाते या उनके बारे में ज्यादा नहीं जानते।”

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